Thursday, May 28, 2015

जल का मरहम

भोर से निकला हुआ मुसाफ़िर,
बुझ कर जैसे बेहाल हुआ।
इस मुरझाये से चेहरे पे,
खुशियों का जो आकाल हुआ।
था हरियाली का साया जो,
वो न तो अबकी साल हुआ।
फसलें जो अब चौपट हुयी,
फिर किसान कंगाल हुआ।

अम्बर को निहारते रहते कि
तपता सूरज थक जायेगा।
नीला सा दिखता साया ये,
बादलों से फिर ढक जाएगा।

धरती हमसे अब ख़फ़ा हुयी,
जैसे हमसे कोई ख़ता हुयी।
आँसुओं से खेतों को सींचा,
नदियां जो अब लापता हुयी।
बारिश को तरसें हम बेबस,
पर बादलों की है आँख-मिचौली।
देकर खुशियों का ये झांसा,
लौटें लेकर अपनी टोली।

जो इंतेज़ार है सावन का,
जाने किस हद तक जाएगा!
धरती के आँचल में बादल,
जल का मरहम रख जाएगा।


Wednesday, April 08, 2015

Piku: Glad to know the actors of this flick.

Last time it was Madras Cafe (2013). This time it would be Piku. I am talking about the focus of praise. 
I mean I appreciate this man (Shoojit Sircar) for his choice of actors. I am glad to know that this time two great stars of film industry share the same stage - Amitabh Bachchan and Irrfan Khan. My expectations with this movie are high. Another reason being the direction of Mr. Sircar.

Monday, February 23, 2015

Maula Sun Le Re (in my voice)


This song I have recorded in my voice. Friends, please listen to it and give your reviews.